प्रोजेक्ट प्रसादम

प्रोजेक्ट प्रसादम

(वंचितों को भोजन )

प्रेरक: श्री मदविष्णुस्वामीहरिदासीयसंप्रदायाचार्य विश्वविख्यात कथाप्रवक्ता
पूज्य गोस्वामी श्री आनंदवल्लभजी महाराज
सेवायत आचार्य : मंदिर ठा. श्रीबाँकेबिहारीजी महाराज , श्रीधाम वृन्दावन

संचालक - विश्व वैष्णव सेवा संघ
श्री धाम वृन्दावन
संपर्क सूत्र : ९८९७३१२८०८ , ७९०६२५३१२४

उदारमना श्रद्धालु भक्तजन निम्न प्रकार सेवा प्रदान कर सकते हैं|
एकदिवसीय सेवा सहयोग

अपने द्वारा निर्धारित तिथि ( जन्मोत्सव , वैवाहिक वर्षगाँठ , पूर्वजों के स्मृति दिवस अथवा अन्य किसी उपलक्ष्य दिवस ) पर मात्र ३१०० रू.( इकतीस सौ रूपए मात्र ) प्रदान करके आप १०१ जरुरत मंद लोंगो को भोजन करा सकते हैं|
जिस दिन आपके द्वारा सेवा होगी उस दिन के फोटो आपके नाम सहित सेवा सदस्यों के व्हाट्सएप ग्रुप एवं संस्था की पत्रिका में प्रकाशित किये जायेंगे , जिससे सेवा सहयोग की पूर्ण विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता बनी रहे |

विशेष सहयोगी सदस्य

प्रतिदिन की सेवा में ३१०० रु. के अतिरिक्त आने वाले व्यय की पूर्ति हेतु किसी भी खाद्य सामिग्री , सेवा साधन अथवा नकद धनराशि प्रदान करके आप संचालन समिति के सदस्य भी बन सकते हैं | सभी सदस्यों को वार्षिक आय व्यय का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराया जायेगा |

एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग २० करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें भरपेट भोजन भी उपलब्ध नहीं | ऐसे में हम कुछ वंचितों को भी भोजन करा सकें तो यह साक्षात् अपने इष्ट और राष्ट्र की सच्ची सेवा ही होगी |

- पूज्य गोस्वामी श्री आनन्दवल्लभ महाराज जी
तुरगशतसहस्त्रम गोगजानाम च लक्षम ,
कनकरजतपात्रम मेदिनीम सागरान्तां |
विमलकुलवधुनाम कोटिक कान्याश्च ,
दधानांहि नहि सममेतैरनदानं प्रधानम |

श्रद्धालु भक्तजन ,
ठा. श्री बांकेबिहारीजी महाराज की अलौकिक दिव्या कृपा से, पीड़ित मानवता की सेवा हेतु एक संकल्प का उदय हुआ है |
हम प्राय: देखते हैं कि यत्र - तत्र भोजन के वास्तविक जरूरतमंद अनेक लोग ऐसे मिल जाते हैं , जो न तो किसी आश्रम में संतों के साथ भंडारे में बैठकर भोजन कर सकते हैं और न ही अन्नक्षेत्रादि स्थलों तक पहुँच पाते हैं |ऐसे जरूरतमंद प्राय: सरकारी या ट्रस्ट संचालित अस्पतालों , रैनबसेरा ,बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन के आस पास और इधर उधर की झुग्गी - झोपड़ियों में मिलते हैं | आपके अपने विश्व वैष्णव सेवा संघ ने ऐसे वंचितों के लिए आपके पुनीत पावन सहयोग द्वारा भोजन सेवा को आरम्भ करने का विचार किया है | प्रथम चरण के रूप में श्री धाम वृन्दावन में प्रतिदिन जरूरतमंद लोगो को शुद्ध सात्त्विक भोजन जिसमें ठाकुर जी को भोग लगाया हुआ दाल , चावल ,रोटी , सब्जी , अचार - पापड़ आदि का प्रसाद वाहन द्वारा पहुंचाकर उन्हें भोजन कराने की सेवा आरम्भ की है |

संतों की वाणी एवं शास्त्रों के अनुसार भगवान् के लीला धाम श्री वृन्दावन में वास करने वाला प्रत्येक जीव संत स्वरुप ही है अत: यहाँ की गई सेवा और भी महत्त्वपूर्ण और अनंत फल देने वाली हो जाती है |

इस अत्यंत मंगलकारी सेवाकार्य में आपका अति महत्वपूर्ण सहयोग अपेक्षित है |


इस मंगलमय अनुष्ठान की सफलता आपकी पूर्ण रूचि एवं सक्रिय सहयोग पूर्ण परामर्श पर निर्भर है | अत: अतिशीघ्र अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सेवा सहयोग सूचित करें | इस सेवा परियोजना में आपका महत्वपूर्ण परामर्श भी सदैव अपेक्षित रहेगा | आपसे पुन: निवेदन है कि इस महान सेवा कार्य में अवश्य भागीदार बनें |

पीड़ित मानवता की सेवा साक्षात ईश्वर की सेवा है |

मरुँ पर मांगू नहि , अपने तन के काज | परमारथ के कारने , मोहि ना आबे लाज || - कबीर दास