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| | जय श्री राधे | |

विश्व वैष्णव सेवा संघ

पता :- श्री श्री हरिदास धाम युगल विहार , ( निकट सी . के . पब्लिक ) गोपाल खार , परिक्रमा मार्ग , वृन्दावन , मथुरा , उत्तर प्रदेश , भारत

परम कृपालु प्रभु ठाकुर श्री बांकेबिहारीजी महाराज के प्राकट्यकर्ता संगीतशिरोमणि रसिकशेखर श्रीस्वामी हरिदासजी महाराज की परमोज्ज्वल वंश - परंपरा के देदीप्यमान नक्षत्र हैं; श्री मद्विष्णुस्वामी मतावलम्बी श्रीहरिदासीय संप्रदाय के आचार्य गोस्वामी श्रीआनंदवल्लभजी महाराज | श्रीमद्भागवत , रामायण आदि धर्मग्रंथों के सरस ओजस्वी कथाव्यास के रूप में लब्धप्रतिष्ठ आचार्यश्री ने संस्कृत एवं हिंदी - साहित्य की शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही साहित्य , ज्योतिष , आयुर्वेद एवं योगादि विषयों का भी गंभीर अध्ययन किया है |

विश्व वैष्णव सेवा संघ के अध्यक्ष परम पूज्य गोस्वामी श्री आनंदवल्लभ महाराज जी हैं , जो की एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्था है |विश्व वैष्णव सेवा संघ द्वारा बिहारी जी की सेवायें भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में रहने वाले सभी बिहारी जी के भक्तों को दी जाती हैं | अतः विश्व वैष्णव सेवा संघ द्वारा बिहारी जी की सेवाओं से भारत के ही नहीं पूरी दुनिया के भक्तजन लाभान्वित हो रहे हैं | अतः संस्था का कार्य क्षेत्र सीमित न होकर सम्पूर्ण भारत व् विश्व में फैला हुआ है |

इस संस्था के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं जैसे प्रोजेक्ट प्रसादम , कथा आयोजन , चौरासी कोस की परिक्रमा की व्यवस्था , श्री मद्भागवत कथा ,राम कथा , यज्ञ अनुष्ठान आदि आध्यात्मिक कार्यक्रमो का आयोजन कराना , श्री बांके बिहारी महाराज जी मंदिर , वृन्दावन में विभिन्न सेवाओं की व्यवस्था उपलब्ध कराना आदि |

1. प्रोजेक्ट प्रसादम (वंचितों को भोजन )

ठा. श्री बांकेबिहारीजी महाराज की अलौकिक दिव्या कृपा से, पीड़ित मानवता की सेवा हेतु विश्व वैष्णव सेवा संघ द्वारा एक संकल्प (प्रोजेक्ट प्रसादम ,वंचितों को भोजन ) का उदय हुआ है | प्रोजेक्ट प्रसादम की स्थापना 31 अगस्त 2019 को हुई थी । तभी से निरंतर दीन दुःखी लोगों के लिए भोजन सेवा चल रहीं हैं |

हम प्राय: देखते हैं कि यत्र - तत्र भोजन के वास्तविक जरूरतमंद अनेक लोग ऐसे मिल जाते हैं , जो न तो किसी आश्रम में संतों के साथ भंडारे में बैठकर भोजन कर सकते हैं और न ही अन्नक्षेत्रादि स्थलों तक पहुँच पाते हैं | आपके अपने विश्व वैष्णव सेवा संघ ने ऐसे वंचितों के लिए आपके पुनीत पावन सहयोग द्वारा भोजन सेवा को आरम्भ करने का विचार किया है | प्रथम चरण के रूप में श्री धाम वृन्दावन में प्रतिदिन जरूरतमंद लोगो को शुद्ध सात्त्विक भोजन जिसमें ठाकुर जी को भोग लगाया हुआ दाल , चावल ,रोटी , सब्जी , अचार - पापड़ आदि का प्रसाद वाहन द्वारा पहुंचाकर उन्हें भोजन कराने की सेवा आरम्भ की है |

संतों की वाणी एवं शास्त्रों के अनुसार भगवान् के लीला धाम श्री वृन्दावन में वास करने वाला प्रत्येक जीव संत स्वरुप ही है अत: यहाँ की गई सेवा और भी महत्त्वपूर्ण और अनंत फल देने वाली हो जाती है |

2. ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा की व्यवस्था

ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी शक्ति राधा रानी की लीला भूमि है। यह चौरासी कोस की परिधि में फैली हुई है। यहां पर राधा-कृष्ण ने अनेकानेक चमत्कारिकलीलाएं की हैं। सभी लीलाएं यहां के पर्वतों, कुण्डों, वनों और यमुना तट आदि पर की गई। पुराणों में ब्रज भूमि की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसा माना जाता है कि राधा-कृष्ण ब्रज में आज भी नित्य विराजते हैं। अतएव, उनके दर्शन के निमित्त भारत के समस्त तीर्थ यहां विराजमान हैं।

ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा के अंदर 1300से अधिक गांव, 1000सरोवर, 48वन, 24कदम्ब खण्डियां, अनेक पर्वत व यमुना घाट एवं कई अन्य महत्वपूर्ण स्थल हैं। ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा वर्ष भर चलती रहती है|

ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा लगभग 268कि.मी. अर्थात् 168मील की होती है। इसकी समयावधि 20से 45दिन की है। परिक्रमा के दौरान तीर्थयात्री भजन गाते, संकीर्तन करते और ब्रज के प्रमुख मंदिरों व दर्शनीय स्थलों के दर्शन करते हुए समूचे ब्रज की बडी ही श्रद्धा के साथ परिक्रमा करते हैं।

आजकल समयाभाव व सुविधा के चलते वाहनों के द्वारा भी ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्राएं होने लगी हैं। इन यात्राओं को लक्जरी कोच बसों या कारों से तीर्थयात्रियों को एक हफ्ते में समूचे ब्रज चौरासी कोस के प्रमुख स्थलों के दर्शन कराए जाते हैं।

3. कथा आयोजन की व्यवस्था

विश्व वैष्णव सेवा संघ द्वारा श्री मद्भागवत कथा तथा अन्य आध्यात्मिक अनुष्ठान की व्यवस्था कराई जाती है | जहाँ भक्तजन श्री मद्भागवत कथा ,राम कथा तथा अन्य धार्मिक कथाओं का रसास्वादन करते हैं | परम पूज्य गोस्वामी श्री आनंदवल्लभ महाराज जी की ओजपूर्ण वाणी से कथा सुनकर श्रोतागण मंत्र मुग्ध हो जाते हैं |आचार्य श्रीआनंदवल्लभजी महाराज को वक्तृत्व कला यूँ तो विरासत से ही प्राप्त है किन्तु श्री मद्भागवत आदि ग्रंथों के गूढ़ तत्वों की रसमयी विवेचना तथा गंभीर ओजस्वी शैली श्रीमद्भागवत - विश्व के परमवंदनीय महापुरुष से प्राप्त करने का सौभाग्य लाभ प्राप्त हुआ है |
आचार्यश्री जब अपनी मधुर रसाप्लावित ओजपूर्ण वाणी में सदग्रंथों की ग्रंथियों का धारा - प्रवाह विवेचन प्रस्तुत करते हैं तो श्रोतावर्ग मंत्रमुग्ध हो भाव समाधी में गहरे उतर श्यामा - श्याम की दिव्य रस - मन्दाकिनी में अवगाहन कर रसमय हो जाते हैं | इसी का परिणाम है कि आचार्यश्री के श्रोताओं एवं शिष्यों का एक बड़ा वर्ग निरंतर आपकी वाणी का रसास्वादन कर भगवदोन्मुख हो जीवन की धन्यता प्राप्त कर रहा है |
इसके अतिरिक्त अन्य धर्मशास्त्रों का प्रचार व् प्रसार , यज्ञ अनुष्ठान आदि आध्यात्मिक कार्यों का आयोजन कराया जाता है |

4. श्री बिहारी जी महाराज की सेवायें

विश्व वैष्णव सेवा संघ द्वारा श्री बांके बिहारी जी महाराज की विभिन्न सेवायें करने का अवसर प्रदान किया जाता है जिसे भक्तजन अपार श्रद्धा के साथ करते हैं| जो इस प्रकार हैं - पुष्प एवं पुष्प हार सेवा , छप्पन भोग सेवा , पोशाक वस्त्र सेवा , श्री अंग की इत्र मालिश सेवा , दीपक सेवा , तुलसी चन्दन सेवा , दैनिक बाल भोग सेवा , देहली पूजन आदि | इसके अतिरिक्त मुकुट श्रृंगार सेवा , फूल बंगला सेवा , पात्र सेवा , साधू ब्राह्मण भंडारा सेवा एवं उत्सव महोत्सवों पर विशेष सेवा के लिए भी आप संपर्क कर सकते हैं |

इसके अलावा संस्था के प्रमुख उद्देश्य भी हैं जैसे गौ की सेवा हेतु गौशाला , गौवंश की देखभाल के लिए अस्पताल , चिकित्सा एवं संवर्धन के क्षेत्र में भी संस्था कार्य रत है | सभी सनातन धार्मिक त्योहारों का भव्य आयोजन करना , भारतीय साहित्य , संस्कृति एवं संस्कारों का विश्व स्तर पर व्यापक प्रचार -प्रसार करना , ध्यान योग व् आयुर्वेद की कक्षाओं तथा शिविरों का आयोजन करना , वृक्षारोपण अभियान चलाना ,चार धाम सहित विभिन्न तीर्थ यात्राओं का आयोजन करना आदि संस्था के प्रमुख उदेश्य हैं |